Savouring The Thought...
Some words are better if written not said out loud
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AtoZ Challenge
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Wednesday, 17 January 2018
आज फिर
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आज फिर एक उलझन, अपना निशां बना रही है फिर मेरी चाहतो पर, ज़ुल्म ढा रही है चाहत है, पंख खोलकर, कुछ उड़ने की पर न जाने क्यूँ एक डोर, उनको...
तो भी क्या?
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यूँ कर रहा बादल इशारा, मैं अभी बरसूँ यहीं मैं तो सोचती रही, छलका तो, अब मुझको क्या? था रौशनी का इल्म , हवाएँ यूँ चलती हुई कर रही ...
Monday, 15 January 2018
हे ईश्वर!
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हे ईश्वर! तू क्यों ऐसा करता है जग में? कहीं ज़िन्दगी गम में धूमिल, कही सुख से न्यारी है किसी के घर तो चिता जली, कहीं पहली लोहरी की ल...
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